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My First Blog Post
Be yourself; Everyone else is already taken. – Jay singh This is the first post on my new blog. I’m just getting this new blog going, so stay tuned for more. Subscribe below to get notified when I post new updates.
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NRC AND CAB
National Register of Citizens AND Citizenship Amendment Bil नमस्कार दोस्तों आज मैं आपसे एनआरसी के बारे में बात करने आया हूं जो कि सरकार के द्वारा असम के घुसपैठियों के लिए या उनको यह कह सकते हैं कि 1971 में वह व्यक्ति जो बांग्लादेश से विस्थापित होकर भारत में आए थे अपनी जान माल की रक्षा… और पढ़े
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बेरोजगारी
टाइटल से आप समझ गए होंगे की आज किस विषय पर बात करने आया हूँ। हमारे देश में लोग कहते है की सरकारी नौकरी से बेहतर और कोई नौकरी नहीं है, क्योकि इसमें आपको सैलरी समय पर मिलती है। सबसे बड़ा फायदा ये है की आप की नौकरी सुरक्षित रहती है आप… और पढ़े
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अर्थव्यवस्था
भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक समय सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था थी, पर आज चीन नंबर एक की पोजीशन पर है इसकी जीडीपी दर भारत से मात्र .1 % ज्यादा है.इस वक़्त भारत की जीडीपी दर 6.0 % के आस पास है।भारत की अर्थव्यवस्था अपने बुरे दौर से गुजर रही… और पढ़े
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शिक्षा
शिक्षा क्या होती है जिसके पास न हो आप उससे पूछ के देख सकते है क्या महसूस करता होगा वो व्यक्ति आज समाज में जहा शिक्षा का विशेष महत्व है। शिक्षा से समाज में सुधार होता है लोगो की तर्क करने की शक्ति का विकाश होता है। जीवन में सफलता प्राप्त करने और कुछ अलग… और पढ़े
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JNU FEES HIKE PROTEST
Jawaharlal Nehru University जेएनयू को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NACC) ने जुलाई 2012 में किये गए सर्वे में भारत का सबसे अच्छा विश्वविद्यालय माना है.जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की स्थापना सन् 1969 में हुई थी। जेएनयू अधिनियम 1966 (1966 का 53) को भारतीय संसद द्वारा 22 दिसम्बर 1966 में पास किया गया था।इस नाम से आप सब वाकिफ होंगे… और पढ़े
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Introduce Yourself (Example Post)
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अर्थव्यवस्था

भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक समय सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था थी, पर आज चीन नंबर एक की पोजीशन पर है इसकी जीडीपी दर भारत से मात्र .1 % ज्यादा है.
इस वक़्त भारत की जीडीपी दर 6.0 % के आस पास है।
भारत की अर्थव्यवस्था अपने बुरे दौर से गुजर रही है। इसका कारण प्रमाण है सरकार के टैक्स कलेक्शन में कमी आना, आद्योगिक सेटर का नकारात्मक विकास दर, मज़दूरों की छटनी, निर्यात में कमी होना इत्यादि है.
कोयला, कच्चा तेल, उर्वरक, स्टील, पेट्रो रिफाइनिंग, बिजली और नेचुरल गैस उद्योगों को किसी अर्थव्यवस्था की बुनियाद माना जाता है। यही आठ क्षेत्र कोर सेक्टर कहे जाते हैं। इनकी विकास दर में कमी या बढोत्तरी बताती है कि किसी देश की अर्थव्यवस्था की बुनियाद की हालत क्या है।
इस वक़्त भारत के कोर सेक्टर में 31 ओक्टूबर 2019 में आकड़ो के मुताबिक 5.2 % गिरावट दर्ज़ की गए है। इससे आप हालत का अंदाज़ा लगा सकते है। इस चिंता जनक हालत के कुछ कारण सरकार की नीतिया है।
नोटबंदी
नोटबंदी सरकार द्वारा किया एक ऐसा काम है जो इस हालत का प्रमुख जिम्मेदार है। कालेधन को बैंकिंग सिस्टम और सरकार की तिजोरी में लाने के लिया किया प्रयास था जो पूर्णरूप से विफल रहा।
RBI ने एक रिपोर्ट में बयान जारी करके कहा की उसके द्वारा जारी किये गए नोटों में से 99.30% नोट उसके पास वापस आगए।

इसमें किसी भी तरह का कालाधन नहीं पकड़ा गया जिसकी बाते होती थी, थोड़ा या नाम मात्र का धन इसधर उधर फेका गया या जलाया गया पर इसमें आम लोगो को बहुत तकलीफ हुई क्योकि उनके पास जो नोट थे वे अब बेकार थे, ये कालाधन नहीं उनके मेहनत की कमाई थी जो अब किसी काम की नहीं रही थी।
सरकार ने बिना तैयारी के ये नियम लागु किया।
इस देश में लोग जो पढ़े लिखे है वो आज भी बैंकिंग सिस्टम से परिचित नहीं है जिनके पास बैंक अकाउंट है वो भी इस बहुत ज्यादा नहीं जानते। इस पर सरकार ने बिना अध्ययन किये नोटबंदी की और लोगो को डिजिटल लेनदेन के लिए कहा पर ये भारत जैसे देश में जहाँ कुल आबादी का 74. 04% मतलब 92.55 करोड़ लोग शिक्षित माने जाते है इसका मतलब कत्यई ये नहीं हुआ की सब लोग डिजिटल लेनदेन कर लेंगे।
भारत जैसे देश में जहाँ लोग मज़दूरी, बर्तन मझना, रिक्शा चलना, कपडे धोने आदि काम के बदले नगद मांगते है और राशि भी बहुत ज्यादा नहीं होती है वहाँ के लोग क्या डिजिटल लेनदेन को तैयार होंगे जिनको टेक्नोलॉजी की जरा सी भी जानकारी नहीं है ?
गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST)

भारत में टैक्स जमा करना हमेशा से एक कठिन कार्य रहा है इस वजय से देश में टैक्स जमा करने की दर हमेशा से काम रही है चाहे व्यक्तिगत हो या व्यापारिक लोग हमेशा से इससे बचने की कोशिश करते रहे है।
GST से पहले सरकारों ने कई तरह के टैक्स लगा रखे थे जब तक लोग इस टैक्स से तालमेल कर पाते तबतक सरकार नया टैक्स सिस्टम ला दिया इसमें हुआ ये की GST नंबर के आप न तो व्यापार कर सकते और न ही अपना माल माँगा या भेज सकते है। इससे चल रहे व्यापार को झटका लगा, लोगो की नौकरियाँ गई, मांग काम हुई, उत्पादन कम होने लगा और अर्थव्यवस्था मंद होती चली गई।
रुपये में गिरावट

जब भारत में 16 मई 2014 को नयी सरकार का गठन हुआ तो उस समय रूपये की कीमत डॉलर के मुकाबले 59 रूपये के आस पास थी। वर्तमान में ये कीमत 71 रूपये है जिससे आयत के लागत में की बढ़ोत्तरी हुई है।
जिससे भारत का व्यापार घटा बढ़ाकर 103.63 बिलियन डॉलर यानि 74,39,86,71,38,000.00 भारतीय रुपया के बराबर पहुंच गया।
सरकार का लगातार आयत बिल बढ़ाता जा रहा है जिससे की सरकार बुनियादी चीजों पर कटौती कर रही है।
इसे देश के विकाश में बाधा उत्पन्न हो रही है और इसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
किसानो की अनदेखी

सरकार की नीतिया केवल उद्योग जगत को आगे बढ़ने वाली है इसमें किसानो के हितो को अनदेखा किया जा रहा है जिसक कारण किसान आत्महत्या जैसे काम को मजबूर हो जाते है क्योंकी उन्होने बैंको से जो क़र्ज़ लेके फसल लगाई है, अगर उनको फसल के दाम सही नहीं मिलेंगे तो वो कर्ज कैसे लौटाएंगे ?
यहाँ पर बात ये है की भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का विशेष महत्व है क्योकि इस काम में परोछ या अपरोछ 16.5 करोड़ लोग जुड़े है। इतनी बड़ी संख्या में लोगो के पास अगर पैसे नहीं होंगे तो आप कैसे अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा पाएगे।
इन बिन्दुओ पर अगर सरकार ध्यान देती तो आज बात कुछ और होती, पर जो भी है सरकार को ये मालूम है की देश की हालत सही नहीं है वो भले इसे स्वीकार न करे लेकिन बजट के बाद वित्तमंत्री का प्रेस कॉन्फ्रेंस करके टैक्स में छूट देना और कई सारे टैक्स को रोल बैक करना ये ही बताता है की सरकार परेशान है मंदी को लेकर,
क्योकि वर्ल्ड की सारी रेटिंग एजेंसी की रिपोर्ट यही बताती है की भारत में अभी मंदी जैसे की UN ट्रेड एजेंसी के मुताबिक भारत की ग्रोथ 7. 2% से 6.0% पर आ गई है पिछले साल के मुकाबले।
इससे साफ पता चलता है की भारत की इकॉनमी अभी हाल फिलहाल सुधरने वाली नहीं है। अब केवल वक़्त का इंतज़ार करना पड़ेगा की सरकार की नए पॉलिसी का असर देखने में।
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