NRC AND CAB

National Register of Citizens AND Citizenship Amendment Bil

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नमस्कार दोस्तों आज मैं आपसे एनआरसी के बारे में बात करने आया हूं जो कि सरकार के द्वारा असम के घुसपैठियों के लिए या उनको यह कह सकते हैं कि 1971 में वह व्यक्ति जो बांग्लादेश से विस्थापित होकर भारत में आए थे अपनी जान माल की रक्षा के लिए जो बांग्लादेश के सीमा राज्य असम पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा सीमा के क्षेत्र में बस गए तो इसको लेकर असम में काफी विरोध प्रदर्शन हुआ कि यह लोग उनके संस्कृति और भाषा को नुकसान पहुंचाएंगे। फिर इस विरोध की वजह से काफी हिंसा हुई और इस हिंसा की वजह से वहां पर बहुत लोगों की जान गई जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों थे।  जहां पर मसला यह है कि असम के लोग हिंदू मुस्लिम के बारे में नहीं बल्कि बाहर से आए जो कि बांग्लादेशी थे उनके खिलाफ क्योंकि यह लोग असम के लोगों का हक मार रहे थे। यह मानना था स्थानीय लोगों का। इसी वजह से असम में मैं बहुत हिंसा हुई जिसकी वजह से भारत सरकार और असम के स्थानीय नेताओं के बीच एक समझौता हुआ, जिसे असम करार कहा गया। इसमें सरकार ने असम के लोगों के हितों की रक्षा करने के लिए तथा 1971 के बाद से आए हुए घुसपैठियों को असम से बाहर निकालने की बात पर सहमति हुई।
तब सरकार ने वादा की एनआरसी लाएंगे और बाहर के जितने भी घुसपैठिए हैं उन्हें पहचान कर अलग किया जाएगा, पर सरकार ने यह बात ठंडे बस्ते में डाल दी। उसके बाद 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार आई जिसने एनआरसी को लागू किया जिससे कि जो रिपोर्ट निकली उसमें तकरीबन 19 लाख लोग घुसपैठ की के रूप में पहचाने गए। इसमें से भी ज्यादातर हिंदू ही थे इस वजह से हिंदूवादी नरेंद्र मोदी की सरकार आलोचना में गिर गई और इस वजह से कहीं इस पर यह आरोप ना लगे किया सिर्फ हिंदूवादी सरकार होने का ढोंग करती है । इसी कारण बीजेपी की नरेंद्र मोदी सरकार मैं एनआरसी में बाहर निकाले गए हिंदुओं को वापस लेने के लिए सरकार ने सिटीजन अमेंडमेंट बिल 2019 को संसद में पारित करवाया बाहर से आए हुए जितने भी शरणार्थी हैं केवल मुस्लिमों को छोड़कर सबको जो 2014 के दिसंबर 31 तक आए हुए हैं उनको नागरिकता इस बिल द्वारा मिल जाएगी। बिल को लेकर असम में काफी रोष है क्योंकि यह एनआरसी का उल्लंघन कर रहा है एक तरह से देखा जाए तो असम के नागरिकों द्वारा मागे गए एनआरसी का मजाक बना दिया गया।लेकिन भारत सरकार यह कह रही है कि हम एनआरसी को पूरे देश में लागू करेंगे यानी पूरे देशवासियों को असम की तरह अपने आप को इस देश का नागरिक साबित करने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ेगी और यह बताना पड़ेगा कि आप ही वह व्यक्ति हो जो इस देश में जन्म से रह रहा है, और इस देश का नागरिक है।इस वजह से विपक्ष से लेकर देश के विभिन्न इलाकों में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जोरों पर हैं वह सिटिजन अमेंडमेंट बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि सरकार नए संविधान का आर्टिकल 14 का उल्लंघन किया है जिसमें सबको बराबर का अधिकार दिया गया है।इसका मूलता विरोध इस बात को लेकर हैं इसमें केवल धर्म के आधार पर अमेंडमेंट किया गया है जो कि हमारे संविधान खिलाफ तो है, और उसकी आत्मा को भी चोट करता है जहां पर संविधान निर्माताओं ने संविधान बनाते समय इस बात का ख्याल रखा था की भारत एक लोकतांत्रिक देश के साथ साथ  एक धर्मनिरपेक्ष पंथनिरपेक्ष देश होगा जहां सबको बराबरी का अधिकार होगा और सब को कानून की नजर से देखा जाएगा।सरकार को बताना होगा की वह एनआरसी लाकर क्या साबित करना चाहती हैं? क्या अब हर एक देशवासी को कागज कागज लेकर घूमना पड़ेगा कि हम इस देश के नागरिक हैं और आप हमें विदेशी ना समझें या फिर हमको अपने नागरिक होने का सबूत दिखाना पड़ेगा कि हां हम देश के नागरिक हैं विदेशी नहीं है? बात यहीं पर खत्म नहीं होती क्योंकि यह नियम लागू होने से केवल एक धर्म के लोगों को प्रभाव नहीं पड़ेगा बल्कि उन सभी पर प्रभाव पड़ेगा जो इस देश में रह रहे हैं अभी हम जो उत्तर भारतीय हैं या दक्षिण भारतीय हैं हमें ऐसा लगता है की हम आसानी से साबित कर सकते हैं कि हम इस देश के नागरिक हैं लेकिन असम में रहने वाले लोगों से पूछिए कि उन्हें यह साबित करने के लिए कि वह इस देश के नागरिक हैं उन्हें कितने मेहनत करनी पड़ी कितना मानसिक तनाव झेलना पड़ा और जो बाहर से आए थे जैसे बिहार पश्चिम बंगाल झारखंड उन्हें भी यह साबित करने में काफी परेशानी हुई और पैसे खर्च करने पड़े कि वह इस देश के नागरिक हैं। तो जरा सोचिए यह समस्या हमें थोक के भाव दी जा रही है और हम भी अपने जरूरी काम छोड़ के केवल यह साबित करने में लग जाएंगे की हम और हमारा परिवार इस देश का नागरिक है इसके लिए हमें काफी मशक्कत करनी पड़ेगी सच मानिए इतना आसान नहीं होगा अगर सरकार इसे लागू करेगी तो इस समस्या का सामना हम सब को करना पड़ेगा और काफी दर्द और तनाव देगा इसे अगर अभी नहीं रोका गया तो बाद में हम केवल पछताएंगे और यह सोचेंगे कि काश कि पहले हम इसे रोक लिए होते पहले सरकार को इसके लिए मना कर दिया होते हैं सोचिए गा।

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